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कबीर परमेश्वर का अद्भुत ज्ञान

अद्भुत ज्ञान
 कबीर परमेश्वर ने ही सतलोक के विषय में बताया कि ऊपर एक ऐसा लोक है जहां सर्व सुख है। वहां कोई कष्ट नहीं है। जिसकी गवाही संत गरीबदास जी ने दी है।
 गरीब, संखो लहर महर की उपजै, कहर जहां न कोई।
 दास गरीब अचल अविनाशी, सुख का सागर सोई।।
तीनों देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की वास्तविक स्थिति से परिचित करवाते हुए परमात्मा कबीर जी ने कहा :-
 तिनके सूत है तीनों देवा, आंधर जीव करत हैं सेवा।
कबीर परमात्मा का तत्वज्ञान
 काल कौन है, कहां रहता है, वह हमें कष्ट क्यों देता है, काल के सभी कार्यों के बारे में परमात्मा कबीर जी ने ही विस्तार से बताया है ।
 सतलोक पृथ्वी लोक से कितनी दूरी पर स्थित है और वहां कैसे जाया जा सकता है। यह जानकारी कबीर परमात्मा जी ने ही दी है ।

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कबीर साहेब जयंती VS कबीर साहेब प्रकट दिवस

कबीर प्रकट दिवस  जयंती तो उसकी मनाई जाती है जिसकी जन्म- मृत्यु होती है, लेकिन "कबीर साहेब" अविनाशी भगवान हैं, जिनकी कभी भी जन्म-मृत्यु नहीं होती। कबीर साहेब ने अपनी वाणियों में स्पष्ट किया है, कि उनका जन्म नहीं होता।  ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।  काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।  माता पिता मेरे कछु नाही, ना मेरे घर दासी।  जुलहे का सुत आन कहाया, जगत करे मेरी हांसी।।

Janmashtami :Lord Krishna

ऋग्वेद मंडल नंबर 9 सुक्त 1मंत्र 9 में लिखा है की पुर्ण परमात्मा माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेता वो अवतरित होते हैं और उनकी परवरिश कुँवारी गायों के दूध से होती है | लेकिन जैसा की हमें पता कृष्ण जी ने देवकी माँ के गर्भ से जन्म लिया तथा उनकी परवरिश गायों के दूध से हुई | और दुसरी तरफ कबीर साहेब जी ही लहरतारा तालाब पर अवतरित हुए और उन्हें वहां से निसंतान दम्पति उठा कर ले गए और उनकी परवरिश कुँवारी गाय के दूध से हुई तो यह सिद्ध होता है कि पूर्ण  परमात्मा कबीर साहेब जी हैं | Krishna Janamashmi 

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